चीन द्वारा कोरोना वायरस प्रकृति का दंडहै जिसे तो भुगतना ही पड़ेगा।

नसीब सिंह :--> राष्ट्रीय अध्यक्ष/निदेशक 
Crime Investigation & Anti-Corruption Bureau 
    मानव जीव और उसकी खुराक खान पान आज के मानव को यह समझना ही पड़ेगा की वह अन्य प्राणियों से अलग है ईश्वर प्रकृति ने उसे अलग क्यों बनाया है और उसका रहन सहन खान पान कैसा होना चाहिए। वार्ना भयंकर परिणाम के लिए तैयार रहे। 
          प्राचीन विज्ञानं , अध्यात्म विज्ञानं ने         प्रकृति ईश्वर के द्वारा उत्पन्न नाना अनेकानेक जीव , प्राणियों को इस पृथ्वी पर उत्पन्न किया जिसे मानव को समझने समझाने के लिए प्राचीन विज्ञानं , अध्यात्म विज्ञानं महान वैज्ञानिकों ने प्रकृति के  84  लाख जीवों -प्राणियों को चार भागों विभाजित किया है। जिसे अण्डज ,पिण्डज , स्थावर ,उखमज  नाम से सम्बोधित किया।  जिसमे इस दो पैर दो हाथ वाले प्राणी को मानव - मनुष्य प्राणी को सर्वश्रेष्ठ की संज्ञा दी क्यों की इसी जीव प्राणी को प्रकृति ईश्वर ने मन रूपी एक वह शक्ति दी है जो अन्य प्राणियों को नहीं है , इसी लिए इस प्राणी को मानव  मनुष्य नाम से सम्बोधित कर एक पहचान बनी ईश्वर ने  हर प्राणी को अलग अलग खान पान की व्यवस्था की. मानव व शाकाहारी प्राणियों के नाख़ून और दांत चिपटा चौकोर बनाया , जैसे मानव  मनुष्य, गाय बैल , भैस , बकरी , सूअर , ऊंट इत्यादि जो अपने भोजन को चबा चबा कर खाते  हैं  , और शाकाहारी प्राणी पानी को मुंह में खींच कर पीते हैं ,,,  जबकि मांसाहारी प्राणी के नाख़ून दाँत नुकीले होते हैं और ऐसे जीव प्राणी अपनी खुराक को दांत से नोच नोचकर निगल जाते हैं  ऐसे जीव प्राणी पानी को जीभ से चभर  चभर कर पीते  हैं। यहाँ यह लिखना भी जरुरी है की मानव को छोड़ कर अन्य जीव  प्राणी प्रकृति के हिसाब से जीते हैं इस लिए उसे भोग योनि के नाम से कहा गया है , लेकिन मानव कर्म योनि कहा गया है और मानव अपने स्वार्थ अपने जुबान के  स्वाद के लिए वह कार्य करने लगा जो मानव के लिए है ही नहीं अपने स्वार्थ अपनी जीभ के स्वाद के लिए जानवर से भी गया गुजरा अप्रकृति तौर करने लगा। नीचे के फेसबुक में शिव पुराण की वीडिओ में चाइना के लोगों द्वारा राक्षसी शैतानी जानवर जैसे भोजन खाने की जानकारी दी गयी है जिसे आप देखकर समझ सकते हैं। 
    आगे मानव ने  जहाँ अपनी बुद्धि विवेक ज्ञान से बहुत तरक्की कर अपने लिए हर सुख सुविधाएँ अर्जित कर सर्वश्रेष्ठ होने का प्रमाण दिया , वहीँ प्रकृति के खिलाफ जाकर अन्य जीव जानवर प्राणी  लेकिन  और मानव अपने स्वार्थ अपने जुबान के  स्वाद के लिए वह कार्य करने लगा जो मानव के लिए है ही नहीं अपने स्वार्थ अपनी जीभ के स्वाद के लिए जानवर से भी गया गुजरा अप्रकृति तौर करने लगा। 
     लाजमी हैं जब मनुष्य एक राक्षस ,एक शैतान और जानवर से भी गिरा आचरण खान पान करेगा तो उसे तो भुगतना ही पड़ेगा।   



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